
…नारायणपुर की अंग्रेजी शराब भट्टी बनी जनता की मुसीबत, नशे का अड्डा बनता जा रहा है मुख्य बाज़ार इलाका
शराब लेने वालों की भीड़ से रास्ता बंद, महिलाएं असहजशराब पीकर सड़क पर ही महफिल, गंदगी और डर का माहौल
भट्टी से शराब लेकर निकलने के बाद लोग वहीं सड़क किनारे बैठकर खुलेआम सेवन करते हैं। 3 से 5 लोगों के समूह फुटपाथ पर बैठकर शराब की बोतलें खोलते हैं, जिससे पूरा इलाका नशे का अड्डा बन चुका है। चारों ओर गंदगी, प्लास्टिक ग्लास, बोतलें और उल्टी की बदबू फैली रहती है। यह क्षेत्र अब परिवार और बच्चों के लिए असुरक्षित हो गया है।

शराब दुकान के ठीक पीछे स्थित चिकन और मछली बाज़ार में रोज़ाना परिवार सहित लोग खरीदारी के लिए आते हैं। लेकिन भट्टी के सामने का दृश्य इतना अशोभनीय और शर्मनाक होता है कि बच्चों के मन पर गलत प्रभाव पड़ता है। क्या प्रशासन यह सब नहीं देख पा रहा, या देखकर भी आंखें मूंदे हुए है?घटनाएं प्रशासन की नींद नहीं तोड़ पा रही हैं

सवाल उठता है – क्या शराब माफिया और सरकार की राजस्व लालसा के आगे आम जनता की सुरक्षा और गरिमा कोई मायने नहीं रखती?
क्या अंग्रेजी शराब दुकानें आम जनता के लिए विकास का प्रतीक हैं या विनाश का कारण?
यह खबर शराब दुकान की सच्चाई को सामने लाने के लिए है। प्रशासन यदि अब भी मौन रहा, तो यह मौन एक दिन आम जनविरोध का रूप ले सकता है।