October 31, 2026 10:14 pm

बच्चों का भविष्य अंधकार मय कर्मचारी ले रहे हैं घर बैठे वेतन

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मामला विकासखंड ओरछा के संकुल केंद्र धुरबेडा अंतर्गत संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शाला पारस बेड़ा का है जहां शिक्षकों की बड़ी लापरवाही सामने आई है

एक तरफ तो शासन प्रशासन शिक्षकों एवं शालाओं का युक्ति युक्तकरण करते हुए प्रदेश में शिक्षा गुणवत्ता में सुधार लाने का ढोल पीट रही है जिसके फल स्वरुप आए दिन शिक्षा विभाग द्वारा कई प्रकार के नए-नए प्रयोग किया जा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ शिक्षा विभाग के अधिकारी कर्मचारी मिलकर शिक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं और अबूझमाड़ जैसे सुदूर अंचल के नव निहाल आदिवासी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण है उच्च प्राथमिक शाला पारस बेड़ा जहां कुछ दिन तीन माह पहले ही शिक्षा विभाग द्वारा युक्तिकरण के नाम पर दो और शिक्षकों की पदस्थापना तो कर दिया गया था जिससे ग्राम परसबेड़ा के ग्रामीणों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर एक उम्मीद की किरण जगी थी ग्रामीण सोच रहे थे अब उनके बच्चे भी पढ़ लिख कर शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे और देश प्रदेश में अपना और अपने परिवार का नाम रोशन कर सकेंगे परंतु शिक्षकों की घोर लापरवाही से मासूम बच्चों एवं ग्रामीणों का सपना टूटते नजर आ रहा है बता दे की एक स्कूल प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक में चार शिक्षक होने के बावजूद भी शिक्षकों का स्कूल न जाना और घर बैठे वेतन लेना बहुत ही दुर्भाग्यजन है जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा

अबूझमाड़ में शिक्षा गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए आए दिन समीक्षा बैठकों का ढोल पीटा जाता है परंतु शिक्षा विभाग के अधिकारी कर्मचारी ही निरंतर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं फिर चाहे मामला फर्श बेड़ा का हो या अन्य स्कूलों का जिन शिक्षकों को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त हो उसे भला किस बात की चिंता जबकि पूर्व में शिक्षा गुणवत्ता को मजबूत बनाने के लिए अधिकतम 5 से 10 स्कूलों को मिलाकर एक संकुल केंद्र बनाए गए थे जिसमें संकुल समन्वयको  की नियुक्ति  जिसका मुख्य उद्देश्य स्कूलों में अकादमिक सहयोग प्रदान करते हुए बच्चों के शिक्षा गुणकता में सुधार लाना था जिसमें संकुल समन्वय द्वारा प्रतिमाह कम से कम दो बार संकुल के शाला में उपस्थित होकर बच्चों एवं शिक्षकों को एकेडमिक सहयोग प्रदान करना होता है परंतु संबंधित संकुल के संकुल समर व्यक को इससे कोई मतलब नहीं है प्राप्त जानकारी अनुसार संबंधित संकुल समन्वयक अपना मूल कर्तव्य छोड़कर विकास खंड स्रोत समन्वय के साथ समन्वय बनाते हुए शिक्षकों को अपने साथ घूमाते हैं एवं अन्य कार्य में व्यस्त रहते हैं और स्वयं भी कई कई दिनों तक स्कूल नहीं जाते हैं यह भी संज्ञान में आया है कि संबंधित स्कूलों के लापरवाह शिक्षक धुरबेड़ा समन्वयक  के खास मित्रों में आते हैं वही विकासखंड ओरछा के खंड स्त्रोत समन्वयक संकुल समन्वयक  के खास है कहीं ना कहीं यह मामला स्पष्ट करता है कि इन मामले में शिक्षकों को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है जिससे शिक्षकों का हौसला बुलंद है और वह बिंदास इस प्रकार की लापरवाही कर रहे हैं और घर बैठे वेतन ले रहे हैं इसके पूर्व भी ग्रामीणों द्वारा ग्राम में पदस्थ एक शिक्षक के ऊपर लगाया गया था आपति जनक गंभीर आरोप जांच का विषय है क्या वेतन का कुछ हिस्सा संकुल समन्वयक एवं विकासखंड स्त्रोत समन्वयक अथवा अन्य उच्च अधिकारियों तक भी पहुंचता है जिससे शिक्षकों को कोई डर नहीं है इस प्रकार की और भी बहुत से प्रकरण है जो उजागर नहीं है बहुत जल्द ही ऐसे और भी मामले उजागर किए जाएंगे अब देखना है जिला प्रशासन इस लापरवाह शिक्षक संकुल समन्वयक विकासखंड स्त्रोत समन्वयक एवं अन्य जिम्मेदार  कर्मचारि अधिकारियों पर क्या

कार्यवाही करती है और उन मासूम नौनिहालों बच्चों को शिक्षा की राह मिल पाएगी या फिर मामला निपटा दिया जाता है यह क्षेत्र वन मंत्री केदार कश्यप का विधानसभा क्षेत्र है जो हमेशा से दावा करती है कि आदिवासी बच्चों को हर मूलभूत सुविधा जैसे शिक्षा और और स्वास्थ्य का औसार प्रदान किया जा रहा है परंतु वास्तविक धरातल पर यह पूरी तरह सफेद हाथी दिखता नजर आ रहा है

 शिक्षा विभाग के निर्देश अनुसार…

6 अगस्त को जिले के समस्त स्कूलों में आयोजित किया गया पालक शिक्षक मेगा बैठक जिसमें उपस्थित रहे जिले के तमाम उच्च अधिकारी..?

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