
जिला नारायणपुर में चखना सेंटरों का अवैध संचालन इन दिनों खुलेआम किया जा रहा है। किराना दुकान की आड़ में शराब पिलाने का काम तेज़ी से बढ़ रहा है, जबकि यह दुकानें सड़क किनारे आसानी से दिखाई देने वाली जगहों पर संचालित हो रही हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन द्वारा लगातार अनदेखी की जा रही है, जो कई सवाल खड़े करती है।
किराना दुकान के नाम पर चल रही इन दुकानों में न तो तेल ना चावल ना नमक आवश्यक किराना सामग्री भी उपलब्ध नही है और न ही किसी प्रकार का वैध लाइसेंस प्रदर्शित किया गया है। ग्राहकों से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली जा रही है और बिल मांगने पर उन्हें बिल भी नहीं दिया जाता।
चखना सेंटरों में घरेलू गैस सिलेंडरों का खुलेआम व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। हाल ही में गैस सिलेंडर में आग लगने की घटना में सड़क किनारे स्थित एक चखना दुकान पूरी तरह जलकर खाक हो गई थी, फिर भी प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
नियमों के अनुसार शराब भट्टी से 100–200 मीटर की दूरी पर ही चखना सेंटर स्थापित किए जा सकते हैं, लेकिन इसके विपरीत 10–15 मीटर की दूरी पर ही चखना दुकानें संचालित हो रही हैं। इन दुकानों में नशे की हालत में विवाद, मारपीट और गंभीर झगड़े की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। यदि भविष्य में कोई गंभीर घटना घटती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह एक बड़ा सवाल है।
बीते दिनों कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई
द्वारा जिले में नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई थी, लेकिन कुछ दिन की नाममात्र कार्रवाई के बाद हालात फिर पुराने जैसे हो गए। चखना सेंटरों की संख्या लगातार बढ़ रही है और संचालकों में प्रशासन का कोई भय नहीं दिखाई देता।
चखना सेंटरों में तैयार किए जाने वाले चिकन और मछली में हानिकारक फूड कलर का उपयोग किया जा रहा है। 8–10 दिन पुराने तेल में खाद्य पदार्थ तले जा रहे हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। यह आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ है।
अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या फिर अवैध चखना सेंटरों पर ठोस और स्थायी कार्रवाई की जाएगी?





