
हिंदू है मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के बयान को आदिवासी एकता परिषद कड़ी निंदा करती है -फूलसिंह कचलाम (सीपीआई )
हम प्रकृति की पुजा करते है ,,जल जंगल जमीन हमारे मन में बसता है
आदिवासी सिर्फ प्रकृति के ध्वजवाहक है अपने जल जगंल
जमीन के रखवाले हैं
रही बात गौरी गौरा महादेव ,बुढादेव ,बुढा मतलब सियान बुडहा डोकरा पुर्वज पुरखा ,बूढादेव बूढीमाई अपने पुरखा पुर्वज ।
आप मुख्यमंत्री महोदय जी संविधान पढ़िएगा, भारत की पहली जनगणना 1871 _72 से लार्ड मैकाले ने जनगणना शुरू की 1962 तक अंग्रेजों ने प्रकृति पूजक , मूल निवासी, आदि लिखा है , आदिवासी को किसी भी धर्म में नहीं रखा इसलिए अनुसूचित जनजाति बाबा साहब ने लिखा है बाबा साहब ने जो उस समय भेद भाव के चलते छुआ छूथ जिसको आज ओबीसी समाज हिंदू वर्ड व्यवस्था में जो (शूद्र) लिखा है उच्च जाति व्यवस्था आधारित सूची बनाई उस सूची के अतिरिक्त सूची बनाई उस सूची का नाम रखा अनुसूचित जनजाति जिसमें इस सूची में बहुत सारे जाति शामिल हुए जाति प्रमाण पत्र में अनुक्रमांक आधारित अंकित किया गया है।बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी ने कहीं नहीं लिखा कि आदिवासी हिंदू है। बाबा साहब जानते थे कि आदिवासी प्रकृति पुजक है। बात रही हिंदू धर्म की, हिंदू धर्म वर्ण व्यवस्था में आता है , आदिवासी किसी वर्ण व्यवस्था में नहीं आता है । मेरा सवाल है मुख्य मंत्री से 4 वर्ड व्यवस्था में किस वर्ड में आते है ?
1.ब्राह्मण
2.क्षत्रिय
3.वैश्य
4.शूद्र
आप हिन्दू हो सकते हैं ।तो उपरोक्त किस वर्ड व्यवस्था में आप आते है ? अगर आप उपरोक्त वर्ड व्यवस्था में आते होंगे ।तो आप फर्जी आदिवासी है ।लेकिन किसी धर्म को आप हम पर जबरदस्ती थोप नहीं सकते। धर्मांतरण तो आप कर रहे है ।धर्म सबका निजी मामला है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया कि आदिवासीयों पर हिंदू विवाह अधिनियम लागू नहीं होता है।। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट बोलते है आदिवासी हिंदू नहीं । आप सुप्रीम कोर्ट से बड़े कब हो गए ?
आप किस आधार पर बोल रहे हैं।
माननीय मुख्यमंत्री जी धर्म की आड़ में राजनीति नहीं करिये । आप हसदेव जंगल पर कभी नहीं बोले। वहां भी तो आदिवासी लोग हैं जो उनको विस्थापित कर रहे हैं उस समय पर आपकी आदिवासीयत कहां चले जाती है बताईए जल जंगल जमीन पर मौन हो जाते हों।





